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माँ- फ्री हो कर फ़ोन करती हू!

सुबह के 5 बज रहे थे, और सीमा का अलार्म लगातार बजता जा रहा था | फिर उसका हाथ उस पर पड़ा और वो बजना बंद हुआ | सीमा के लिए सुबह उठना रोज़ का काम था | सुबह का खाना बनाना, बच्चों को स्कूल भेजना, पति का टिफ़िन और फिर अपने भी ऑफिस के लिए निकलना, वक़्त शायद कम ही पड़ता था इस सब कामों के लिए|

काम करते -करते, फिर अचानक उसकी नज़र अपने फोन पर आये अनगिनत मैसेज पर पड़ी| वही सब गुड मोर्निंग मैसेज और बैंक लोन वालों के रोज़मर्रा के बातें। फिर उसके नज़र एक छोटे से मैसेज पर पडी ,” हैप्पी मदर्स डे बेटा ” पढ़ कर उसके चेहरे पर मुस्कान आ गयी और उसने अपनी माँ को जवाब दिया ,” जल्दी ही फ़ोन करती हूँ,” और अपने काम में लग गयी।

फिर क्या दिन ढलता गया , सब लोग अपने अपने काम पर व्यस्त , सीमा का पति अपने ऑफिस, बच्चे स्कूल , और खुद सीमा अपने ऑफिस। फिर ऑफिस में भी मदर्स डे का काफी शोरगुल था। हर कोई सोशल मीडिया पर अपनी माँ की तस्वीर लगा रहा था और याद कर रहा था। ऑफिस में काम करने वाली माँओं के लिए भी अलग इंतज़ाम थे। उसको देखकर अच्छा लगा की उसकी HR की नौकरी में वह लोगो को खुश कर पा रही हैं। उसने वह सब इंतज़ाम काफी अच्छे तरीके से किये थे और काफी दिनों  से इस दिन को अलग बनाने की मेहनत जिसजे लोग अपने माँ के लिए प्यार को याद कर पाए। काफी बिजी था वह दिन, और इसी कारण वह अपनी माँ को फ़ोन नहीं कर पायी।

शाम देर से घर पहुंची , थके हारे , पर जैसे ही वह दरवाजा खोलती हैं एकदम से अँधेरा पाती हैं। उसको थोड़ी चिंता होने लगते है की रात ८ बजे तो उसका पति और बच्चे सब घर में होते हैं और अचानक यह अँधेरा , कहाँ गए सब बिना बताये ? फिर कुछ ही सेकेंड्स में लाइट जलती हैं और बच्चे हैप्पी मदर्स डे विश करते हुई बहार आते हैं। हाथ में केक , जो उसके बच्चे और पति ने मिलकर बनाया था , वह सब से गले लग जाती हैं। और उसकी दिन भर की थकान पल भर में चली जाती हैं।

वह समय उसको अनमोल लगता हैं, और अपने माँ होने पर गर्व , सोचने लगती हैं कि इन बच्चो के बिन उसका जीवन अधूरा हैं। रात को सब डिनर करने बाहर जाते हैं और वापस आते -आते उनको आधी रात हो जाती हैं। बच्चो को सुला कर वह भी अपने कमरे की तरफ जाने लगते हैं तभी उसको अपनी माँ का मैसेज जो सुबह 5 बजे से उसके मैसेज में पड़ा था , अब भी वैसे ही वीरान पड़ा था। और उसका जवाब कि माँ बस मैं फ़ोन करती हूँ, तक सीमित रह गया। उसको एहसास हुआ आज जैसे वह अपने बच्चो के बिना अपना जीवन अधूरा मानती हैं, वही पल उसके माँ के लिए भी होंगे।

अगर सीमा भी आज अकेली होती थो क्या वह भी इतने खुश होती जितनी वह उस समय महसूस कर रही थी ? इतना ही सोच कर वह हड़बड़ा उठी और आधी रात उसने अपनी माँ को फ़ोन लगाया , वैसे तो उसकी माँ रात ९ बजे तक सो जाय करती थी। उसको लगा शायद फ़ोन पर बात न हो। पर एक रिंग जाते ही उसकी माँ ने उसका फ़ोन उठा लिआ। सीमा बोली, आप अब तक जग रही हो ? माँ:- हाँ, तुम्हारे फ़ोन के इंतेज़ार में , सोचा इतने दिनों से बात नहीं हुई , तुम अक्सर बिजी रहती हो, और मुझे भी तुम्हे हर पल फ़ोन करना अच्छा नहीं लगता। सोचा आ मदर्स डे है, तुमको विश कर दूँ। इतना कहते ही सीमा की आँखें नम हो उठी , उसको लगा कि माँ शब्द कभी बूढा नहीं होता , आज भी वह उसकी वही माँ थी, और वैसे ही उसका ख्याल रखती हैं , जैसे वह  30 साल पहले रखती थी। इतना सोच कर वह फ़ोन पर रोने लगी, और अपने माँ को सॉरी बोलने लगी कि उसको शायद यह बात बहुत देर में समझ आयी और उसने कितनी बार उनका फ़ोन नहीं उठाया और मन में यह सोचा की माँ भी रोज़ क्या फ़ोन करते रहती हैं।

माँ-बेटी ने उस रात बहुत देर तक बात करी , सारे गीले शिकवे पूरे किये और सीमा ने वादा किआ की वह सिर्फ एक दिन नहीं बल्कि रोज़ कैसे भी उनसे बात करेगी , चाहे वह कुछ मिनट ही क्यों ना हो। आखिर माँ का रिश्ता , दिल और जज़्बातों से जुड़ा होता हैं , फ़ोन तो बस एक जरिया हैं , इसको व्यक्त कर ने आप रोज़ फ़ोन करते हैं अपनी माँ को ?

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